KEY HIGHLIGHTS
- Comprehensive coverage and live status updates on Donald Trump ने टाला Iran पर हमला? डील के दावे से बढ़ी चर्चा.
- Key statements from government officials and field correspondents.
- Historical context and market/social impact analysis.
- Read full detailed breakdown below.
Donald Trump ने दावा किया कि संभावित समझौते के चलते Iran पर प्रस्तावित हमला फिलहाल रोक दिया गया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमले को फिलहाल रोकने का फैसला किया है, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच समझौते की रूपरेखा (Perimeters of a Deal) बनने की संभावना दिखाई दे रही है। हालांकि, अभी तक किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है और क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि अमेरिका पूरी तरह सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है, लेकिन यदि जल्द समझौता हो जाता है तो हमला नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान और कई मध्य-पूर्वी देशों की ओर से सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया गया था, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। उनके अनुसार, इज़राइल भी इस कूटनीतिक प्रयास का समर्थन कर रहा है।
Trump ने कहा कि संभावित समझौते की प्रमुख शर्तों में Strait of Hormuz को तुरंत और पूरी तरह खोलना तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े खतरे को समाप्त करना शामिल है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है और इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
खाड़ी देशों ने बढ़ाया कूटनीतिक दबाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Qatar, Saudi Arabia और United Arab Emirates ने समन्वित तरीके से अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क कर सैन्य कार्रवाई टालने की अपील की। इन देशों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से युद्ध छिड़ता है तो पूरा मध्य-पूर्व गंभीर अस्थिरता का शिकार हो सकता है।
Saudi Arabia ने भी पुष्टि की कि क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने Trump से बातचीत कर क्षेत्र में शांति बनाए रखने और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। खाड़ी देशों को आशंका है कि नए संघर्ष की स्थिति में कई अन्य मोर्चे भी खुल सकते हैं।
Bab al-Mandab को लेकर भी बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष दोबारा बढ़ता है तो ईरान समर्थित Houthi विद्रोही Bab al-Mandab जलमार्ग को भी निशाना बना सकते हैं। यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। यदि यह मार्ग भी प्रभावित होता है तो वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ सकता है।
हाल के दिनों में बढ़ी थीं सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं
कुछ दिन पहले Trump ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि बातचीत आगे नहीं बढ़ी तो अमेरिका "बहुत कड़ी कार्रवाई" करेगा। वहीं अमेरिकी मीडिया में ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि अमेरिका और इज़राइल ईरान के ऊर्जा ढांचे पर संयुक्त सैन्य अभियान की तैयारी कर रहे हैं।
हालांकि व्हाइट House ने इन रिपोर्टों पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार किया। प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने केवल इतना कहा कि ईरान ने जून में हुए समझौते के ढांचे का पालन नहीं किया है, जिससे वार्ता प्रक्रिया प्रभावित हुई।
Strait of Hormuz बना विवाद की बड़ी वजह
जून में हुए अस्थायी समझौते के तहत दोनों पक्षों ने युद्धविराम बढ़ाने और धीरे-धीरे Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने पर सहमति जताई थी। लेकिन बाद में ईरान ने कुछ जहाजों पर कार्रवाई शुरू कर दी और आरोप लगाया कि वे "अनधिकृत मार्ग" का इस्तेमाल कर रहे थे।
इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की, जबकि ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इसके बाद ओमान की मध्यस्थता में वार्ता फिर शुरू हुई, लेकिन अब तक कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका है।
छह महीने से जारी है तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष पिछले छह महीनों से जारी है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने Strait of Hormuz में आवाजाही लगभग रोक दी थी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के विदेश मंत्रियों से बातचीत की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि अमेरिका या इज़राइल की ओर से कोई नई सैन्य कार्रवाई होती है, या क्षेत्रीय देश उसमें सहयोग करते हैं, तो ईरान उसका "निर्णायक और अनुपातिक" जवाब देगा।
फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन हालात अभी भी बेहद संवेदनशील हैं। ऐसे में दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीति तनाव कम करने में सफल होगी या फिर मध्य-पूर्व एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ेगा।
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