Sun, Aug 16, 2026 | 3:45 AM IST
Home Politics
Menu
Business Profile
HomeIndiaजस्टिस वर्मा क�...
INDIA

जस्टिस वर्मा केस: जांच समिति ने तीनों आरोप सही माने

Vinay kumar mishra
Source: NDTV
Source : NDTV

KEY HIGHLIGHTS

  • Comprehensive coverage and live status updates on जस्टिस वर्मा केस: जांच समिति ने तीनों आरोप सही माने.
  • Key statements from government officials and field correspondents.
  • Historical context and market/social impact analysis.
  • Read full detailed breakdown below.

संसद में पेश रिपोर्ट में कहा गया कि पूर्व दिल्ली हाई कोर्ट जज अपने सरकारी आवास से मिले नकदी के स्रोत और स्वामित्व की संतोषजनक जानकारी नहीं दे सके।


दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट संसद में पेश कर दी है। रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सही ठहराया गया है। समिति ने कहा कि वह अपने आवास से बरामद नकदी की मौजूदगी, स्रोत और स्वामित्व को लेकर संतोषजनक जवाब देने में विफल रहे।

यह मामला 14 मार्च 2025 का है, जब नई दिल्ली स्थित 30, तुगलक क्रेसेंट में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम को वहां एक स्टोररूम से ₹500 के नोटों से भरे कई बोरे मिले थे। उस समय जस्टिस वर्मा घर पर मौजूद नहीं थे। घटना के बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस बीच 200 से अधिक सांसदों ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए महाभियोग की मांग भी की थी। हालांकि अप्रैल 2026 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया, लेकिन उनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है।

पहला आरोप: नकदी के स्रोत की जानकारी नहीं

जांच समिति के अनुसार, सरकारी आवास के स्टोररूम से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। जस्टिस वर्मा नकदी की मौजूदगी, उसके मालिक और स्रोत के बारे में कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसलिए समिति ने इस आरोप को सिद्ध माना।

दूसरा आरोप: सबूतों के संरक्षण में लापरवाही

रिपोर्ट में कहा गया है कि मामले से जुड़े सबूतों को सुरक्षित रखने में गंभीर चूक हुई। कानूनी सीलिंग और निरीक्षण से पहले स्टोररूम की स्थिति में बदलाव किए जाने के संकेत मिले। कुछ करेंसी नोटों के गायब होने या उपलब्ध न होने को लेकर भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। हालांकि समिति ने यह नहीं कहा कि नोट स्वयं जस्टिस वर्मा ने हटाए थे, लेकिन इसे सबूतों के संरक्षण में गंभीर विफलता माना गया।

तीसरा आरोप: जवाब टालमटोल वाला

समिति ने जस्टिस वर्मा द्वारा 22 मार्च 2025 को दिए गए स्पष्टीकरण को भी असंतोषजनक बताया। रिपोर्ट के अनुसार, उनका रुख टालमटोल वाला था और वह एक न्यायाधीश से अपेक्षित संस्थागत जिम्मेदारी तथा पारदर्शिता के अनुरूप नहीं था। स्वतंत्र गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर समिति ने इस आरोप को भी सही माना।

जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद इस मामले में आगे की संवैधानिक और संसदीय कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

TAGS: JusticeYashwantVerma CashRow SupremeCourt InquiryReport Parliament DelhiHighCourt
Vinay kumar mishra

Vinay kumar mishra

TMINS News Desk brings you accurate, unbiased and breaking news from India and around the world 24/7.

Published Date: 12 Aug 2026
Know More About Author

Leave a Comment

Please sign in to join the conversation.

Sign In to Comment

Don't have an account? Sign Up

Sign In with Email
Forgot Password?

By signing in, you agree to our Terms of Service and Privacy Policy.

Don't have an account? Create Account