KEY HIGHLIGHTS
- Comprehensive coverage and live status updates on Naik Shinde विवाद गहराया: नवी मुंबई के विकास मुद्दों पर बढ़ा राजनीतिक टकराव.
- Key statements from government officials and field correspondents.
- Historical context and market/social impact analysis.
- Read full detailed breakdown below.
यूआरएस, एफएसआई और पुनर्विकास योजनाओं को लेकर गणेश नाईक और एकनाथ शिंदे के बीच मतभेद अब खुलकर राजनीतिक बयानबाजी में बदलते नजर आ रहे हैं।
Naik Shinde विवाद गहराया:नवी मुंबई में शहरी नवीकरण योजना (URS), बढ़े हुए एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) और क्लस्टर पुनर्विकास को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। वन मंत्री गणेश नाईक और उपमुख्यमंत्री व नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे के बीच जारी मतभेद अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं। इस विवाद में अब शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के भी कूद पड़े हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
शुक्रवार को सिडको भवन में आयोजित एक बैठक के बाद नरेश म्हस्के ने गणेश नाईक पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे की राजनीतिक भूमिका और नेतृत्व के कारण ही वर्तमान सरकार अस्तित्व में आई और उसी के चलते गणेश नाईक को मंत्री पद मिला। उन्होंने कहा कि जिस नेतृत्व के कारण उन्हें सत्ता और जिम्मेदारी मिली, उसी पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
यूआरएस और अतिरिक्त निर्माण का विरोध
गणेश नाईक लंबे समय से नवी मुंबई में यूआरएस योजना, बढ़े हुए एफएसआई और क्लस्टर पुनर्विकास परियोजनाओं के जरिए होने वाले अतिरिक्त निर्माण का विरोध करते रहे हैं। उनका मानना है कि इन योजनाओं से शहर की वहन क्षमता पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और भविष्य में नागरिक सुविधाओं पर असर पड़ सकता है।
इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए नवी मुंबई महानगरपालिका की महासभा ने शहर की वहन क्षमता का अध्ययन कराने के लिए एक स्वतंत्र संस्था नियुक्त करने का निर्णय लिया है। साथ ही यह भी प्रस्ताव पारित किया गया है कि इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट आने तक यूआरएस के तहत नए क्षेत्रों में अतिरिक्त निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
नरेश म्हस्के का पलटवार
गणेश नाईक द्वारा नगर विकास विभाग की नीतियों पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देते हुए नरेश म्हस्के ने कहा कि एकनाथ शिंदे ने अपने राजनीतिक जीवन में शाखा प्रमुख से लेकर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तक का सफर तय किया है। वहीं उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गणेश नाईक वन मंत्री पद से आगे नहीं बढ़ सके।
म्हस्के ने यह भी आरोप लगाया कि नाईक लगातार ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे सरकार की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के गठन में शिंदे की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वाशी की इमारतों का मामला बना केंद्र
विवाद का एक प्रमुख कारण वाशी सेक्टर-9 स्थित ‘नैवेद्य’ और ‘अलबेला’ इमारतों का मामला भी है। इन इमारतों को जारी किए गए अग्निशमन विभाग के अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) को लेकर महासभा में गंभीर सवाल उठाए गए थे।
गणेश नाईक ने दावा किया कि अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने दबाव में आकर कुछ मंजूरियां दी थीं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और आवश्यक होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। इसके अलावा नगररचना और विधि विभाग के कुछ अधिकारियों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
मानसून के बाद कार्रवाई के निर्देश
नाईक ने नगर निगम प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता या दबाव में अनुमति दी गई है तो संबंधित इमारतों को अवैध घोषित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि मानसून अवधि समाप्त होने के बाद 5 सितंबर से आवश्यक कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।
साथ ही उन्होंने कथित फर्जी शपथपत्रों की जांच कर दोषियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की भी मांग की है। नाईक ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भाजपा पदाधिकारी का भी अवैध निर्माण पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी समान कार्रवाई होनी चाहिए।
नवी मुंबई का यह विवाद अब केवल निर्माण और विकास परियोजनाओं तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला राजनीतिक प्रभाव, प्रशासनिक जवाबदेही और शहरी विकास नीतियों पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में यह टकराव महाराष्ट्र की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
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